हजारीबाग की हृदयस्थली में बसी झील के जायके में अब एक नया स्वाद लोगों को मिलने जा रहा है। एक नए कॉन्सेप्ट के तहत यहां अब फ्लोटिंग रेस्तरां खुलने की योजना है। वाजप्ता इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है। दुःखद पहलू यह है कि फ्लोटिंग रेस्तरां चालू होने के पहले ही विवादों में घिर गया है। यह विजन कहां से आया, इस योजना पर काम किसके माध्यम से हो रहा है और लोगों की सेहत पर क्या फर्क पड़ेगा, इन बातों पर चर्चा हुई या नहीं। नतीजतन जितनी मुंह, उतनी बातें सरेआम और सोशल मीडिया पर आम हो रही हैं। नेचर से दूर होती झील पर बहस तेज है। पहले तो कंक्रीट से पिच रोड और झील किनारे गार्डवाल लगा इसके नैसर्गिक रूप से खिलवाड़ करने की बात सामने आयी। फिर गंदे नाले का पानी झील में बहाने पर चर्चा हुई। त्रिमूर्ति चौक के इर्द-गिर्द सेहत बनाने से लेकर मिजाज बनाने के फूड प्लेस खासकर फास्ट फूड के खोमचों और मछली बाजार पर सवाल उठे। अब झील में तैरते रेस्टोरेंट की बारी आयी। पहले से स्वर्ण जयंती पार्क कैफेटेरिया और झील परिसर में पर्दे के पीछे से ठेले पर होनेवाले कारोबार पर भी विवाद छिड़ता रहा है।
सुलगते सवाल, कई बातों पर बवाल: आज जेन जी के युग में कपल का आनंदित स्थल झील तट बन गया है। परिवार संग भी लोग भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। खा-पी कर गंदगी फैलाने वालों की कमी नहीं। पार्किंग की घोर समस्या और रास्ता एक। ऐसे में भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक की समस्या बढ़ेगी। लोग जाम में उलझेंगे। इधर से लोगों की आवाजाही यानी आम रास्ता रोकने की योजना पर भी चर्चा है। इधर आदतन लोग फ्लोटिंग रेस्तरां के दौरान झील की सेहत का कितना ख्याल रखेंगे, यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा। प्रयोग करने में कोई हर्ज नहीं है।
नगर निगम को आर्थिक स्रोत से मतलब: नई-नई योजनाएं लाकर नगर निगम अपना आर्थिक स्रोत बढ़ाना चाहता है। मॉर्निंग और इवनिंग वॉकर्स की सेहत की फिक्र इन योजनाओं के आगे फीकी पड़ जा रही है, ऐसा रोजाना सैर-सपाटे में आनेवाले लोगों का मानना है। ठेकेदारों की अपनी फिक्र है। राजनीतिज्ञों की भी अपनी पड़ी है। प्रशासन का अपना नजरिया अपना दृष्टिकोण है। सभी की अपनी-अपनी दलील है। सच तो यह है कि हजारीबाग की झील को दुधारू गाय बना दिया गया है।
थोड़ी सलाह, थोड़ा मशविरा: हजारीबाग की हृदय स्थली "झील" सौंदर्यीकरण का विरोध क्यों हो रहा है। जिस माध्यम से जो कुछ हो रहा है, उसे सार्वजनिक करने की जरूरत है। फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की जगह बदल दी जाए, तो बेहतर होता। यहां तीन बड़ी झीलों की श्रृंखला है। एक झील में जहां बापू की विशाल प्रतिमा विराजमान है, ठीक उसके पीछे फ्लोटिंग रेस्तरां बने, तो शायद विरोध के स्वर धीमे पड़ सकते हैं। वहां तीन ओर से रास्ता भी है। जाम की समस्या नहीं होगी। वहां इस रेस्तरां की वजह से सिवरेज के गंदे और बदबूदार पानी पर भी रोक लगती। लोग आसानी से वहां जा पाएंगे। मॉर्निंग और इवनिंग वॉकर्स को भी में मुख्य झील परिसर में सैर-सपाटे में परेशानियां नहीं होंगी।
- अखौरी ब्रजेश सहाय

